बिहार

Lakhisarai अस्पताल में लापरवाही, शव वाहन न मिलने से घंटों पड़ा रहा शव

Kavita2
8 July 2026 1:52 PM IST
Lakhisarai अस्पताल में लापरवाही, शव वाहन न मिलने से घंटों पड़ा रहा शव
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लखीसराय: बिहार के लखीसराय सदर अस्पताल में मरीजों और उनके परिजनों के प्रति लापरवाही का एक और मामला सामने आया है। मंगलवार को इलाज के दौरान एक वृद्ध मरीज की मौत के बाद अस्पताल प्रशासन पर शव वाहन उपलब्ध नहीं कराने का आरोप लगा है। परिजनों का कहना है कि वाहन की व्यवस्था नहीं होने के कारण मृतक का शव कई घंटे तक अस्पताल परिसर में स्ट्रेचर पर ही पड़ा रहा।

घटना के बाद अस्पताल की व्यवस्था और मरीजों के परिजनों को मिलने वाली सुविधाओं को लेकर सवाल उठने लगे हैं। परिजनों ने आरोप लगाया कि अस्पताल प्रबंधन से शव वाहन की मांग करने के बावजूद उन्हें समय पर सहायता नहीं मिली और वे काफी देर तक परेशान होते रहे।

इलाज के दौरान वृद्ध की हुई मौत

जानकारी के अनुसार, चानन प्रखंड के धनवह बेलदरिया गांव निवासी 70 वर्षीय राजेंद्र बिंद को सोमवार को इलाज के लिए लखीसराय सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

परिजनों के मुताबिक, मंगलवार सुबह करीब 10 बजे अचानक उनकी तबीयत ज्यादा खराब हो गई। चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मियों ने उनका इलाज शुरू किया, लेकिन स्थिति में सुधार नहीं हो सका और इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

मरीज की मौत के बाद परिवार के लोग शोक में डूब गए। इसके बाद उन्होंने शव को घर ले जाने के लिए अस्पताल प्रशासन से शव वाहन उपलब्ध कराने की मांग की।

शव वाहन नहीं मिलने से परेशान रहे परिजन

मृतक के स्वजनों का आरोप है कि अस्पताल की ओर से शव ले जाने के लिए वाहन की व्यवस्था नहीं की गई। इसके बाद वे निजी वाहन की तलाश में इधर-उधर भटकते रहे।

परिजनों का कहना है कि इस दौरान मृतक का शव तीन घंटे से अधिक समय तक अस्पताल परिसर में स्ट्रेचर पर रखा रहा।

उन्होंने बताया कि परिवार के लिए पहले ही मौत का दुख बड़ा था, ऊपर से शव को घर ले जाने के लिए वाहन की व्यवस्था करना एक बड़ी परेशानी बन गई।

अस्पताल व्यवस्था पर उठे सवाल

इस घटना के बाद सदर अस्पताल की व्यवस्थाओं पर सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में मरीजों के इलाज के साथ-साथ मृत्यु के बाद शव को सम्मानपूर्वक घर तक पहुंचाने की व्यवस्था भी होनी चाहिए।

मरीजों के परिजनों ने आरोप लगाया कि जरूरत के समय अस्पताल प्रशासन की ओर से सहयोग नहीं मिलने से उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।

उन्होंने मांग की कि अस्पताल में शव वाहन की सुविधा नियमित रूप से उपलब्ध कराई जाए, ताकि भविष्य में किसी अन्य परिवार को इस तरह की परेशानी न झेलनी पड़े।

परिजनों ने बताई अपनी परेशानी

मृतक के परिवार वालों ने बताया कि राजेंद्र बिंद को बेहतर इलाज की उम्मीद से अस्पताल लाया गया था। इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई, जिसके बाद परिवार को शव घर ले जाने की चिंता सताने लगी।

उन्होंने कहा कि अस्पताल परिसर में लंबे समय तक शव के पड़े रहने से उन्हें मानसिक परेशानी हुई। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन से इस मामले में जवाबदेही तय करने की मांग की।

अस्पताल प्रबंधन से जवाब का इंतजार

मामले को लेकर अस्पताल प्रशासन की ओर से अभी विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, इस तरह की घटनाएं स्वास्थ्य व्यवस्था और मरीजों के अधिकारों को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।

सरकारी अस्पतालों में इलाज के अलावा मरीजों और उनके परिवारों को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना भी जरूरी माना जाता है। शव वाहन जैसी सुविधाओं की कमी से गरीब और जरूरतमंद परिवारों को सबसे ज्यादा परेशानी होती है।

स्वास्थ्य व्यवस्था सुधारने की जरूरत

लखीसराय सदर अस्पताल की इस घटना ने एक बार फिर सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में सुविधाओं की स्थिति पर चर्चा शुरू कर दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि अस्पतालों में पर्याप्त संसाधन, प्रशिक्षित कर्मचारी और संवेदनशील व्यवहार बेहद जरूरी है।

मरीजों के परिजनों के साथ सम्मानजनक व्यवहार और आपात स्थिति में तत्काल सहायता उपलब्ध कराना स्वास्थ्य सेवाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

फिलहाल मामले के सामने आने के बाद लोगों की नजर अस्पताल प्रशासन की कार्रवाई पर है। परिजन उम्मीद कर रहे हैं कि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न हो और अस्पताल में मरीजों व उनके परिवारों को बेहतर सुविधा मिल सके।

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